इस फल को खाने से मिलती है 40 मर्दों के बराबर ताक़त, हज़रत मुहम्मद(स.अ.व.) ने ..

धर्म/ज्योतिष

आसलाम ओ अलैकुम दोस्तों, हम सभी जानते हैं कि इस्लाम दुनिया के सबसे आला मज़ाहिब में से एक है. इस्लाम ने दुनिया को नेकी का रास्ता दिखाया है. इस्लाम में छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात की जानकारी किसी न किसी तरह से दी गई है. आज हम आपको इस्लाम की एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं जिससे आपका काफ़ी फ़ायदा हो सकता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे फल के बारे में। इस फल के बारे में शायद आपने न सुना हो या फिर हो सकता है कि सुना ही हो.

इस फल में ऐसी कई खूबियां भरी पड़ी हैं जिससे हमें कई बी’मा’रि’यों में आराम मिलता है. यह फल अक्सर पहाड़ी इलाकों में ही पाया जाता है.अरबी में इसे सफ़रजल के नाम से जाना जाता है और फारसी में बही। अंग्रेजी में इसे क्विन्स कहा जाता है। अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल-लल-लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि इस फल को हर शख्स खाए क्यूँकि ये हमारे दिल को बेहतर करता है और सीने के बोझ को उतार देता है.

आपको बता दें कि हज़रत अनस रज़ी अल्लाहू अनहु से रिवायत है कि प्यारे नबी (सअव्) ने फरमाया कि बही खाने से दिल से जुड़ी बी’मा’रि’यां नहीं होती। ये हमें दिल के दौ’रे से दूर रखता है। अ’ल्ला’ह ने ऐसा कोई न’बी नहीं मामूर फ़रमाया जिसे ज’न्न’त का बही ना खिलाया हो क्योंकि ये इंसान की ताक़त को चालीस अ’फ़’रा’द के बराबर कर देता है।

प्यारे नबी ने फर’मा’या है कि औरतों को भी वही फल खाना चाहिए और म’र्दों को भी मि’सा’ल के तौर पर बही फल दिल की बी’मा’रियों के लिए बहुत मुफीद है। अगर हमल के दौरान खाया जाये तो हमल के गिरने से काफ़ी ह’द तक मह’फ़ूज़ रहा जा सकता है। बही के इस्तेमाल से पे’शा’ब खुल कर आता है।

जि’ग’र की बी’मा’री में मुफ़ीद है। गर्मी के बाय से होने वाले सिर’द’र्द को दूर करने का एक क़ुद’रती ग़ि’ज़ा’ई टॉ’नि’क है।गर्मी के बाइस होने वाले नज़’ला और खां’सी के लिए मुफ़ी’द है। इसके साथ ही बही फल दमे की बी’मा’री के लिए भी शि’फा ए बख्श से साबित होता है। दिल और दि’मा’ग की गर्मी को दू’र भगाता है और बलगम और सीने की खर’खरा’हट को भी ठीक करता है। खुश्क खां’सी के लिए बड़ी फल काफी मुफीद है।

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